भवनों में लगा कर डेरा माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

भवनों में लगा कर डेरा माँ,

मेरी कुटियाँ में आना भूल गई,

अपने ही दर के दीवानो की तकदीर जगाना भूल गई,

भवनों में लगा कर डेरा माँ,

धरती से लेकर अम्बर तक हर जीव की तुझको चिंता है,

तेरे अध्भुत साही लंगर से हर इक प्राणी पलता है,

तूने भर दिया पेट माँ सब का ही हम को ही खिलाना भूल गई,

भवनों में लगा कर डेरा माँ,

मेरे दिल का हाल मेरी माता मैं तुमको ही बताऊ गा,

इस झूठे रिश्ते नातो की सच्ची बाते समजाउ गा,

तुम खुद ही फेंसला करना मैं सच कहु तो करना भूल गई,

भवनों में लगा कर डेरा माँ,

पतझड़ के सूखे पेड़ो पर अब ला भी दो हरयाली माँ,

तेरा जरा सा हाथ हिले तो आ जायेगी खुशहाली माँ,

हम जैसे किस्मत मारो की किस्मत चमकाना भूलगी,

भवनों में लगा कर डेरा माँ,

कुल श्रिष्टि की तुम माता हो हम भी तो तुम्हारे अपने हो,

मेरे दिल में उमंगे है कुछ कुछ अपने भी सपने है,

निर्दोष के धुंदले सितारों को तुम क्यों चमकाना भूल गई,

भवनों में लगा कर डेरा माँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।