सब तो पहला माँ कहना सिखियाँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दिल दी किताब उते न तेरा लिखियाँ,

सब तो पहला माँ कहना सिखियाँ

नो महीने माँ ने गर्व च उठाया खुद सो के गीले ते सुके से सुआलया,

माँ वरगा न कोई दूजा मैनु दिसियां,

दिल दी किताब उते न तेरा लिखियाँ,

सब तो पहला माँ कहना सिखियाँ

ऊँगली पकड़ के माँ ने चलना सिखाया ,

बोलना सिखिया नाल हसना सिखियाँ,

श्रवण जेहा लाल कर्जा ला भी न सकया,

दिल दी किताब उते न तेरा लिखियाँ,

सब तो पहला माँ कहना सिखियाँ

माँ चरना च तीर्थ सारे माँ तो बड़ी पूजा न,

सच कहंदा गोपाल माँ रब दा ना दूजा,

हर चेहरे दे विच चेहरा तेरा दिसिया,

दिल दी किताब उते न तेरा लिखियाँ,

सब तो पहला माँ कहना सिखियाँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।