तू इतनी दूर क्यों है माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तू इतनी दूर क्यों है माँ बता नाराज क्यों है माँ,

मैं तेरा हु बुलाले तू गले फिर से लगा ले तू,

ओ माँ प्यारी माँ

तेरे अंचल की छाया को मेरी नींदे तरसती है,

तेरी यादो के आँगन में मेरी आँखे बरसती है,

परेशान हो रहा हु मैं अकेला रो रहा हु मैं,

मैं तेरा हु बुलाले तू गले फिर से लगा ले तू,

ओ माँ प्यारी माँ

सुना है मैंने माँ का दिल नहीं होता पत्थर का,

भुलाता है तुझे आजा अकेला कण मेरे घर का,

दीवारे गिरादे अब झलक अपनी दिखादे अब,

मैं तेरा हु बुलाले तू गले फिर से लगा ले तू,

ओ माँ प्यारी माँ

तेरे चरणों में मंदिर है तू हर मंदिर की मूरत है,

हर इक भगवान की सूरत मेरी माँ तेरी सूरत है,

मेरी पूजा तेरा दर्शन तेरी सेवा मेरा जीवन,

मैं तेरा हु बुलाले तू गले फिर से लगा ले तू,

ओ माँ प्यारी माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।