शिव नाथ मेरा गोरा नू वयोंन चलेया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कौन चलेया जी कौन चलेया,

शिव नाथ मेरा गोरा न वयोंन चलेया,

सजे भूत ते प्रेत वेखो वैखरी जनेत,

आज वखरा ही रूप दिखाऊं चेल्या,

कौन चलेया जी कौन चलेया,

शिव नाथ मेरा गोरा नू वयोंन चलेया

पिंड उते बसम रमा ली स्पा दी गल माला पा ली,

नाही सेहरा ओहने लाया मथे चंद है चढ़ाया रूप वखरा ही सब न वखाऊं चलेया,

कौन चलेया जी कौन चलेया,

शिव नाथ मेरा गोरा नू वयोंन चलेया

देवी देवते फूल बरसौंदे भुत चुड़ेला भंगड़े पाउंदे,

लगी रौनक बरंगी आगे होके नाचे नंदी बेंड बाजे दी तना ते यह बजाऊं चलेया,

कौन चलेया जी कौन चलेया,

शिव नाथ मेरा गोरा नू वयोंन चलेया,

सारा जग दा पालनहारा गाउँदा है संजीव सितारा,

कैलाश दा है वासी कटे सब दी चौरासी जेहड़ा गोरजा नू आज व्याओं चलेया,

कौन चलेया जी कौन चलेया,

शिव नाथ मेरा गोरा नू वयोंन चलेया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।