खोलो साई मेरी किस्मत का ताला

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॥ पावन पाठ ॥

खोलो साई मेरी किस्मत का ताला,

खोलो बाबा मेरी किस्मत का ताला,

ये अँधियारा जीवन मेरा थोड़ा कर दो उजाला,

खोलो साई मेरी किस्मत का ताला,

लाखो भिखारी दर तेरे आके हो गए साई धनवान है,

तेरे चरणों में साई सुख के सुना है सारे सामान है,

फिर गम की परछाइयों से मुझे तूने न निकाला,

खोलो साई मेरी किस्मत का ताला,

दुःख के गहरे काले बादल पीछा करते है मेरा,

चारो तरफ से इस जीवन में कांटो ने मुझको गेरा,

अब तेरे सिवा इस दुनिया में नहीं कोई रखवाला,

खोलो साई मेरी किस्मत का ताला,

सूली ऊपर सेहज हो जैसे ऐसे पल पल बीते है,

फुर्सत हो तो देख लो आकर कैसे साई हम जीते है,

फिर तेरी दया ने हे साई क्यों न मुझको संभाला,

खोलो साई मेरी किस्मत का ताला,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।