घनन घनन घन घंटा वाजे चामुंडा के द्वार पर

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

घनन घनन घन घंटा वाजे चामुंडा के द्वार पर

रुकी जहां पर काल रात्रि चण्ड मुण्ड को मारकर

घनन घनन घन घंटा वाजे...

निर्मल जल की धारा में पहले आकर इश्नान करो

ज्योत जलाकर मन मंदिर में अंबे माँ का ध्यान धरो

वरदानी से मांगों वर तुम दोनों हाथ पसार कर

रुकी जहां पर काल रात्रि चण्ड मुण्ड को मारकर

घनन घनन घन घंटा वाजे...

शक्ति पीठ यही माँ चलका देव भूमि भी प्यारी है

क्रोध रूप जहां चामुंडा का खप्पर संग कटारी है

दुष्टों की ली बलि जहां पर भागे पापी हारकर

रुकी जहां पर काल रात्रि चण्ड मुण्ड को मारकर

घनन घनन घन घंटा वाजे...

ब्रह्मा वेद सुनाएं इनको विष्णु शंख वजाते हैं

शंकर डमरू वजा वजा कर माँ की महिमा गाते हैं

जय माता की गूँज रही हैं नारद वीणा तार पर

रुकी जहां पर काल रात्रि चण्ड मुण्ड को मारकर

घनन घनन घन घंटा वाजे...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।