जय काली मैया जय काली अमावस की रात है

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जय काली मैया जय काली अमावस की रात है ये काली,

अमावस की रात है ये काली काला ही रूप धरे माता माँ काली,

जय काली मैया जय काली अमावस की रात है ये काली,

छम छम छम छम आई महाकाली रे आई महाकाली रे,

दर पे संगारने आई महाकाली रे आई महाकाली ,

रक्त बीज को मारे महाकाली,

जय काली मैया जय काली अमावस की रात है ये काली,

अमावस की रात में घूम रही काली रे घूम रही काली,

लट खोल के झूम रही काली रे,संग में घूमे है औगड़दानी,

नील नेत्र खोल के मारे किलकारी,

जय काली मैया जय काली अमावस की रात है ये काली,

दानव दलन को मार रही काली रे काट रही काली,

मोरही का रूप धरे मरघट वाली रे मरघट वाली

मुंडो की माला पहने है काली खून का प्याला पी गई काली,

जय काली मैया जय काली अमावस की रात है ये काली,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।