गोरी को नंद म्हारे आँगण आज आयो

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

गोरी को नंद म्हारे आँगण आज आयो रे,

आँगण आज आयो बाबो, रिद्धि सिद्धि लायो रे,

भक्तो का , सिरताज बाबा , शम्भू सुतवारी रे,

गजानंद आया ,छाई , मन में खुशियां भारी रे,

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी रे,

सिर पे मुकुट सोहे , मुसे की सवारी रे,

सूंढ़ सुंढालो बाबो , बड़ो मतवालों रे,

खोल देवे बाबो म्हारो , किस्मत को तालो रे,

रण थम्बोर से , आयो गजानंद रे,

गजानंद करियो म्हारे , घर मे आनंद रे ,

चितांमण गणेश बाबो ,चिंता सबकी हरे रे,

शुभ और लाभ देवे , सबका मंगल करे रे,

मालवा का तीर्थ प्यारा ,है वो खजराना रे,

गोरी सूत गणेश का ,जग है दीवाना रे,

सिद्ध विनायक , मुम्बई का राजा रे,

आजा एक बार तू , इनकी शरण आजा रे,

जिसने भी प्रेम से , बाबा को बुलाया रे,

सुनके पुकार वो , बाबा चला आया रे,

पान सुपारी ,ध्वजा नारियल लाऊ रे,

लडुवंन का भोग ,बाबा तुमको लगाऊ रे,

गोरी का लाल प्यारा , शम्भू सुतवारी रे,

दिलबर के संग विक्रम ,शरण तुम्हारी रे ,

।। सिंगर विक्रम गुण्डिया राजगढ़।।

।।रचनाकार।।

दिलीप सिंह सिसोदिया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।