मेरे पाप ही ज्यादा पुण्य है कम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे पाप ही ज्यादा पुण्य है कम श्री राधे वसा लो वृन्दावन,

श्री राधे वसा लो वृन्दावन,

मेरे पाप ही ज्यादा पुण्य है कम

विशियो की आँधी आती है सब पुण्य नष्ट कर जाती,

अब किसको कहु मेरे बीते जनम श्री राधे,

श्री राधे वसा लो वृन्दावन.........

जिनकों मैं अपना कहता हु जिनके अंग संग में रहता हु ,

वही रिश्ते बिगड़े मेरे कर्म,

श्री राधे वसा लो वृन्दावन,

हे सर्वेश्वरी किरपा करदो करुणाकर झोली भर दो ,

अब तो रखो मुझे अपनी शरण,

श्री राधे वसा लो वृन्दावन,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।