साई साई कहते प्राण तन से निकले

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

साई साई कहते प्राण तन से निकले,

साई साई कहते प्राण तन से निकले,

इतनी आरजू है मुझको साई बाबा मिले,

साई साई कहते प्राण तन से निकले,

बचपन से तुमको चाहा और मैंने पूजा,

तेरी सिवा न और कोई मेरा दूजा,

लाज मेरी तुम रखना एह साई बाबा,

तेरी शिरडी है मेरा कासी और काबा,

शिरडी की भूमि में मेरा दम निकले,

इतनी आरजू है मुझको साई बाबा मिले,

साई साई कहते प्राण तन से निकले,

तेरी फकीरी के साई दीवाने है हम,

साई बाबा के संग है तो क्या है गम,

तू भगतो के सुख दुःख में रहता हर दम,

तेरी रेहमत से मेरी आंखे होती है नम,

तेरी चौकठ से मेरा शव निकले,

इतनी आरजू है मुझको साई बाबा मिले ,

साई साई कहते प्राण तन से निकले,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।