अग्रसेन महाराज जी तुम्हे लाखों प्रणाम

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॥ पावन पाठ ॥

अग्रसेन महाराज जी तुम्हे लाखों प्रणाम,

लाखो प्रणाम तुम्हे लाखो प्रणाम,

अग्रसेन महाराज जी तुम्हे लाखों प्रणाम

तुझबीण कौन हमारा है,तेरा ही हम को सहारा है,

जीवन के आधार जी,तुम्हे लाखो प्रणाम,

अग्रसेन महाराज जी तुम्हे लाखों प्रणाम

सब की सुनाई करते हो कष्ट सभी के हरते हो,

भरते हो भंडार जी,तुम्हे लाखो प्रणाम,

अग्रसेन महाराज जी तुम्हे लाखों प्रणाम

तेरे खेल निराले है क्या से क्या कर डाले है,

महिमा अप्रम पार जी तुम्हे लाखो प्रणाम,

अग्रसेन महाराज जी तुम्हे लाखों प्रणाम

बिनु शीश निभाता है तेरे ही गुण गाता है,

मुझपे तेरे उपकार जी तुम्हे लाखो प्रणाम,

अग्रसेन महाराज जी तुम्हे लाखों प्रणाम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।