रग रग दे रोग मिटावे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

रग रग दे रोग मिटावे इको पूड़ी जय माता दी,

इको पूड़ी जय माता दी,

जेहड़ा श्रदा दे नाल खावे,

रग रग दे रोग मिटावे इको पूड़ी जय माता दी,

जेहड़ा खावे अमृत वेले मैया दे रंगा विच खेले,

माँ चरना दे विच लावे, इको पूड़ी जय माता दी,

रग रग दे रोग मिटावे.............

मैया जी दे खेड़ न्यारे भव सागर तो आप माँ तारे,

माँ सुते भाग जगावे इको पूड़ी जय माता दी,

रग रग दे रोग मिटावे.............

पंकज पिंका भेटा गावे सब भगता नु नाल नचावे,

माँ दी जय जय कार भुलावे इको पूड़ी जय माता दी,

रग रग दे रोग मिटावे.............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।