ओढ़े लाल लाल चुनरी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ओढ़े लाल लाल चुनरी सिंह पे सवारी माँ आज आई रे,

देखो माई लगे प्यारी सिंह पे सवारी माँ आज आई रे,

माँ के माथे पे कुम कुम की बिंदियां है सोहे,

गले नीबूवन की माला है माँ ने पिरोये,

ओढ़े लाल लाल चुनरी

जब जाऊ मियां के दर पे भगति दीप जलाऊ माँ,

नंगे पग से मैं चल आउ तेरा दर्शन पाउ माँ,

ओढ़े लाल लाल चुनरी...

कलकत्ते की काली मैया नैया पार लगाओ माँ,

महीयर वाली शारदा माई बिगड़ी मेरी बनाओ माँ,

ओढ़े लाल लाल चुनरी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।