रे मन मुर्ख कब तक जग में जीवन व्यर्थ बिताये गा

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

रे मन मुर्ख कब तक जग में जीवन व्यर्थ बिताये गा,

राम नाम नहीं गायेगा तो अंत समय पछतायेगा,

रे मन मुर्ख कब तक जग में जीवन व्यर्थ बिताये गा,

राजा राम राम राम राजा राम राम राम राजा राम राम,

जिस जग में तू आया है यहाँ इक मुसाफिर खाना है,

रात में रुक कर सुबह सफर कर यही से चले जाना है,

लेकिन येह भी याद रहे सांसो का पास खजाना है,

रे मन मुर्ख कब तक जग में जीवन व्यर्थ बिताये गा,

मन की वासना शूद्र जैसी भुधि नहीं निर्मल की है,

झूठी दुनिया दारी से क्या आस मोक्श के फल की है

रे मन मुर्ख कब तक जग में जीवन व्यर्थ बिताये गा,

पौंछ गुरु के पास ज्ञान की दीपक का उजाला ले,

कंठी पहन कंठ में जप की सुमिरन की तू माला रे,

रे मन मुर्ख कब तक जग में जीवन व्यर्थ बिताये गा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।