मुझसे अधम अधीन उवारे न

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॥ पावन पाठ ॥

दृग उरझत टूटत कुटुम, जुरत चतुर चित प्रीत,

परत गाँठ दुरजत हिये, दई नई यह रीति ,

मुझसे अधम अधीन, उवारे न जायेंगे,

प्रभु आप दीनबंधु, पुकारे न जाएंगे,

मुझसे अधम अधीन ,,,,,,,,,,,

खामोश हूँगा मै भी, अगर आप यही कह दो,

अब मुझसे कभी पातकी, तारे न जाएंगे,

मुझसे अधम अधीन,,,,,,,,,

जो बिक चुके हैं और, खरीदा है आपने,

अब वह गुलाम गैर के, द्वारे न जाएंगे,

मुझसे अधम अधीन,,,,,,,,,,

पृथ्वी का भार आपने, कई बार उतारा,

क्या मेरे पाप भार, उतारे न जाएंगे,

मुझसे अधम अधीन, उवारे न जायेंगे,

प्रभु आप दीनबंधु , पुकारे न जाएंगे

मुझसे अधम अधीन उवारे न जायेंगे

सिंगर भरत कुमार दवथरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।