माँ हर शहर में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

झूमे नाचे गाये खुशियां मनाये भकती मन हरने,

नवरातो में आती है सब के घर में माँ हर शहर में,

रखती है अपने भक्तो को नजर में माँ हर शहर में,

मिल के बोलो आज सारा यह है जय जय माँ,

ऐसा नजारा प्यारा मिलेगा अब और कहा,

झूमे नाचे गाये खुशियां मनाये, भकती मन हरने

नवरातो में आती है सब के घर में माँ हर शहर में

कोई यहाँ नहीं माँ जैसा मौका मिले न ऐसा,

जो भी जो मांगे मिले प्यार हो जा पैसा ,

जो माँ के दर पे जाए बिन मांगे ही सब पाए

भर्ती है सब की झोली कोई खाली नहीं आये,

होके शेर पे सवार छोड़ के आई है बहार,

दर्श मिले बार बार सुबह शाम दुपहर में,

नवरातो में आती है सब के घर में माँ हर शहर में

नवरात में आती है ख़ुशी साथ में लाती है सब के घर में हर शहर में,

दुःख हर के ले जाती है सुख भर के वो जाती जीवन भर में हर शहर में,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।