मंदिरा च ढोल वजे मेरा जी नचन नु करदा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन दुर्गा भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेला लगेया सोहन महीने मेले च मीह पीया वरदा,

मंदिरा च ढोल वजे मेरा जी नचन नु करदा,

माँ नु आके देवो वधाईयां दुरो दुरो संगता ने ाईयां

नच नच सारे खुशियां मनाउंदे हर कोई चौंकी भरदा,

मंदिरा च ढोल वजे मेरा जी नचन नु करदा,

आजो आजो झोलियाँ भरलो भोली माँ दे दर्शन करलो ,

शेरसवारी माँ दी प्यारी शेर जदो भी गज दा,

मंदिरा च ढोल वजे मेरा जी नचन नु करदा,

लकी राजा भेटा गावे जग्गी महिमा लिखदे जावे,

श्याम दाती दे खेड़ निराले नौकर बन जा दर दा,

मंदिरा च ढोल वजे मेरा जी नचन नु करदा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।