बघवा में तू चढ़के आना कर सोला शृंगार हो

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बघवा में तू चढ़के आना कर सोला शृंगार हो,

नवराति में दर्शन देना भगतो का करना बेडा पार हो,

नो दिन माँ के ज्योत जलाई माँ अम्बे ओ शारदे,

द्वीप लगाए धुप जलाये और चढ़ाये हार रे,

ढोल भजाये नगाड़ा भजाये और करे माँ आरती ,

नवराति में दर्शन देना भगतो का करना बेडा पार हो,

नो नो खप्पर होये जवारे पना तेरा भार सँवारे,

माँ जब नाचे झूम झूम के लट बिखराये काले काले,

मनसा सुर को मार गिराए नैन दिखाए लाल वो,

नवराति में दर्शन देना भगतो का करना बेडा पार हो,

पान सुपारी ध्वजा नारियल माँ तुम को भेट चढ़ाये,

हलवा पूरी और चना की मैया तुझको भोग लगाए,

हाथ उठा कर जैकारा लगाए गाये तेरा गुणगान हो,

नवराति में दर्शन देना भगतो का करना बेडा पार हो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।