एक फ़क़ीर से मांग रहा है भीख ज़माना सारा

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॥ पावन पाठ ॥

हो गया हैरान देख कर शिर्डी में नजारा,

एक फ़कीर से मांग रहा है भीख ज़माना सारा,

बाँट रहा जागीरे जग को इक बेघर बनजारा,

वो बंधा नही किसी मजहब से उसका तो रिश्ता है सब से,

मांगे वो दुआये सब के लिए जब बाते करता है रब से,

अपनी छड़ी से लिख देता है वो तकदीर दोबारा,

बाँट रहा जागीरे जग को इक बेघर बनजारा,

जादू है उसकी बोली में सब कुछ है उसकी झोली में,

सुख दुःख की आँख मचोली में वो शामिल है हर टोली में,

जिस जिल्वे को हाथ लगाये वो बन जाए सितारा,

बाँट रहा जागीरे जग को इक बेघर बनजारा,

निर्धन को बनाता है जो धनि सनी की बिगड़ी वाही बनी,

मैं भी जा लगा कतारों में जिस चोकठ पर थी बीड लगी,

मेरा नसीबा जाग गया है जब तेरा नाम पुकारा,

बाँट रहा जागीरे जग को इक बेघर बनजारा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।