मेरे कंठ बसो महारानी सरस्वती वंदना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मात शारदा उर बसों, धरकर सम्यक रूप,

सत्य सृजन करता रहूं, लेकर भाव अनूप,

सरस्वती के नाम से, कलुष भाव हो अंत,

शब्द सृजन होवे सरस, रसना हो रसवंत,

मेरे कंठ बसो महारानी,

मेरे स्वरों को अपना स्वर दो ,

गाउँ मैं तेरी बानी,

मेरे कंठ बसो महारानी

जीवन का संगीत तुम्ही हो,

आशाओं का दीप तुम्ही हो,

शब्द सुधा से दामन भर दो,

मैं याचक तुम दानी मां,

मेरे कंठ बसो महारानी

लय और ताल का ज्ञान भी दे दो,

स्वर सरगम और तान भी दे दो,

मेरे सीस पे हाथ धरो मां,

सरस्वती कल्याणी,

मां मेरे कंठ बसो महारानी,

मेरे स्वरों को अपना स्वर दो,

गाउँ मैं तेरी बानी,

मेरे कंठ बसो महारानी

सिंगर भरत कुमार दवथरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।