ओ मावड़ी थारी रूप की शोभा न्यारी

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॥ पावन पाठ ॥

ओ मावड़ी थारी रूप की शोभा न्यारी,

थारे नैनो की ज्योत निराली महारी मावड़ी,

ओ मावड़ी थारी सती की महिमा भारी,

सतियो में महासती रानी महारी मावड़ी ,

मावड़ी था जग में डंका बाजे,

सारी सृष्टि में थारो उजिजारो महारी मावड़ी ,

ओ मावड़ी थारे राह में फूल विशवा,

पलको पे थाने बिठावा माहरी मावड़ी,

रेनू वविता थारा ही गुण गावा,

थारी सेवा जन्म बितावा माहरी मवड़ी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।