हां सँवारे पतंग मेरी उड़ गई है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जब से नजर तेरी पढ़ गई है,

हां सँवारे पतंग मेरी उड़ गई है,

पहले मैं उडाता था तो झट कट जाती थी,

जयदा देर आसमान मे टिक नहीं पाती थी,

जब से ये हाथो तेरे पढ़ गई है,

हां सँवारे पतंग मेरी उड़ गई है,

नशा तेरे भजनो का कैसा मैं बताऊ,

नींदो में सँवारे मैं गुण तेरे गाउ,

जब से खुमारी तेरी चढ़ गई है,

हां सँवारे पतंग मेरी उड़ गई है,

हर्ष की डोरी बाबा थामे युही रखना,

ढीली मत छोड़ देना कस के पकड़ना,

जब से ये प्रीत तुम से जुड़ गई है

हां सँवारे पतंग मेरी उड़ गई है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।