गुरु वचनो को रखना सँभाल के

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

गुरु वचनो को रखना सँभाल के इक इक वचन में गहरा राज़ है,

जिसने जानी है महिमा गुरु की उसका डूबा कभी न जहाज़ है ।

दीप जले और अंधेरा मिटे न ऐसा कभी नहीं हो सकता,

ज्ञान सुने और विवेक न जागे ऐसा कभी नहीं हो सकता ।

जिसकी रोशनी से रोशन जहान है वो फरिश्ता बड़ा ही महान है,

जिसने जानी है महिमा गुरु की उसका डूबा कभी न जहाज़ है ॥

बीज पड़े और अंकुर न फूटे ऐसा कभी नहीं हो सकता,

कर्म करे और फल न भोगे ऐसा कभी नहीं हो सकता ।

कर्म करने को तूँ होशिआर है फल भोगने में बड़ा ही लाचार है,

जिसने जानी है महिमा गुरु की उसका डूबा कभी न जहाज़ है ॥

ठोकर लगे सतगुर न संभाले ऐसा कभी नहीं हो सकता,

जब हम पुकारे और वो न आए ऐसा कभी नहीं हो सकता ।

उसके हाथों में सौंप दे हाथ तूँ वो तो अंग संग तेरे साथ है,

जिसने जानी है महिमा गुरु की उसका डूबा कभी न जहाज़ है ॥

गुरु परिपूर्ण समर्पित तूँ हो जा धोखा कभी नहीं खा सकता,

लक्ष्मण रेखा सतसंग की हो तो रावण कभी नहीं आ सकता ।

अब तो हर पल होता आभास है गुरु सदा ही हमारे साथ है,

जिसने जानी है महिमा गुरु की उसका डूबा कभी न जहाज़ है ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।