नाग देवता त्राहि माम्

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नाग देवता त्राही माम त्राही माम,

वो शंकर के गले को सजाने वाले है,

वो विषनु को शैया पर सुलाने वाले हैं

नाग देवता त्राहि माम-त्राहि माम,

कोमल कोमल अंग तिहारा,

श्याम रंग तुझे लागे प्यारा,

झील-मील झील मील चाल तिहारा

जैसे गंगा जल की धारा,

वो झुम के हजारो बरसाने वाले हैं ,

वो भक्तों की लाज बचाने वाले हैं,

नाग देवता त्राहि माम, त्राहि माम्,

रोये बालक सोये माता,

ये कैसा अन्याय विधाता,

हम बालक हैं, तुम पालक हो,

नेत्र दान दो जीवन दाता,

प्राण दान दो जीवन दाता,

वो शीश पर धरती को उठाने वाले हैं,

राजा राम जी के संग रहने वाले हैं,

नाग देवता त्राहि माम त्राहि माम्,

सौरभ सोनी

सरिया, गिरिडीह

झारखंड, ८२५३२०

संपर्क - 8210062078

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।