श्यामा अपने प्रेमी नु सताना नहियो चाहिदा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्यामा अपने प्रेमी नु सताना नहियो चाहिदा

निकी निकी गल रुस जाना नहियो चाहिदा

असा कदो रोकया सी मखणा नु खान ते

कुंज गली दे विच रास रचान ते

प्रेम बडाके छुपाना नहियो चाहिदा

श्यामा.........

असा तेरे खातिर छड़या घर बार नु

यमुना बहाने आये तेरे दीदार नु

घर घर असा लोरो लाना नहियो चाहिदा

श्यामा.........

जो तेरा दिल चाहे कर वे अनीतीया

किसे नु ना दसागी साडे नाल बितीया

ताने सुन सुन घबराना नहियो चाहिदा

श्यामा..........

मारदे ने म्हणे श्यामा अपने ते गैर वे

केह्डी गल दा है तेरा साडे नाल बैर वे

लगन लगाके तरसाना नहियो चाहिदा

श्यामा............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।