मेरा गरीब खाना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी अर्जी न ठुकराना, न और मुझे तरसाना l

कभी आ भी जा घर मेरे, मेरा कोई सिवा न तेरे ll

मेरा गरीब खाना, तुमको बुला रहा है ll

दो पल ही, माँ आ जाओ, तुमको अग़र हो फुर्सात l

दो पल ही, माँ आ जाओ, तुमको अग़र हो फुर्सात,

यह भगत तेरी राह में, पलकें बिछा रहा है l

मेरा गरीब खाना,,,,,,,,,,,,,,,,

माँ हो के बच्चों से तुम, यूँ दूर कैसे हो गई,

''दुनियाँ की तुम हो मालिक, मजबूर कैसे हो गई'' l

अनमोल नेम्तों से, सबको ही भर दिया है,

''हम बदनसीबों से माँ, मुँह फेर क्यों लिया है" l

मायूस ज़िंदगी है, सर पे माँ हाथ रख दो l

देखो यह लाल तेरा, आँसू बहा रहा है l

मेरा गरीब खाना, ,,,,,,,,,,,,,,,,,

पत्थरों में रहकर दिल क्यों, पत्थर सा कर लिया है,

"इस लाडले का जीवन, काँटों से भर दिया है" l

रस्ते में अब न रुकना, कहीं देर हो न जाए,

"तेरी देर से भवानी, अंधेर हो न जाए" l

दुनिया की बेरूखी का, क्यों कर गिल्ला करूँ l

अपना नसीब जब माँ, नजरें चुरा रहा है l

मेरा गरीब खाना,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

ये वक्त बेवफा है, जिसने है साथ छोड़ा,

"अब तुम को क्या कहूँ माँ, तुम ने भी हाथ छोड़ा" l

ममता की तुम हो देवी, कुछ तो ख्याल करती,

"मेरा कोई तो मैय्या, पुरा सवाल करती" l

तुम रहम की हो गंगा, कैसे यह मान लूँ मै l

तेरे होते जग ये मुझपे, बड़े ज़ुल्म ढाह रहा है l

मेरा गरीब खाना,,,,,,,,,,,,,,,,

कुल दुनियाँ की तुम, माँ हो xll

फिर मेरी वार, कहाँ हो xll

आ दुःख मैं, अपना रो लूँ xll

अश्कों से तेरे, पग धो लूँ,,, xlllमाँ,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।