शिरडी के साई भक्तो के साई तेरे सदा ही जय

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॥ पावन पाठ ॥

शिरडी के साई भक्तो के साई तेरे सदा ही जय,

ढोल भजाओ नाचो गाओ तेरी सदा ही जय,

शिरडी के साई भक्तो के साई तेरे सदा ही जय,

कलयुग का तू अवतारी साई बन के आया,

कलयुग में तेरे नाम ने तो,

सब को पार लगाया,

मेरी किसमत लिखने वाले तेरी सदा ही जय,

शिरडी के साई भक्तो के साई तेरे सदा ही जय,

कण कण में है वास तुम्हरा बोले द्वारका माई,

नीम की ठंडी छाव पुकारे,

याद न मेरी आई,

लकी को याद रखने वाले तेरी सदा ही जय,

शिरडी के साई भक्तो के साई तेरे सदा ही जय,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।