जिनका मेरी मैया से लगाव हो गया

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॥ पावन पाठ ॥

जिनका मेरी मैया से लगाव हो गया

दूर ज़िन्दगी का हर अभाव हो गया

नदी वो मिली है सागर में जा ज़रूर

जिसका ठीक राह पे बहाव हो गया

जो भी बैठे है माँ की कश्ती में

लग जाए चार चाँद हस्ती में

जो भी गुण मैया के गाते हैं

उनके चर्चे है गली बस्ती में

ज़िन्दगी में उनके बदलाव हो गया

जिनका मेरी मैया से ..............

जिनको दादीजी का सहारा है

उनका मंझधार है किनारा है

जो भी भक्ति करे है मैया की

कभी हिम्मत नहीं वो हारा है

हर हाल में खुश रहने का सहाव हो गया

जिनका मेरी मैया से ..............

वो बड़े खुशनसीब होते हैं

माँ के जो भी करीब होते हैं

जो भी हाँ दूर झुंझुनू वाली से

वो बड़े बदनसीब होते है

भक्तों जिनका मैया से अलगाव हो गया

ज़िन्दगी में उनके तनाव हो गया

जिनका मेरी मैया से ..............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।