कहती हूँ मैं रो रो के

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आये है श्याम बाबा नीले सवार होके

मेरे घर से अब ना जाना कहती हूँ मैं रो रो के

मेरे घर है बाबा आए खुशियां हज़ार लाये

आँखों की पुतलियों में मेरे श्याम हैं समायें

जीवन की डोर बाबा सब छोड़ दी हैं तो पे

मेरे घर से अब ना जाना कहती हूँ मैं रो रो के

मेरे घर का हर एक कोना सूना पड़ा था मोहन

तूने जो कदम डाले है झूम उठा आँगन

सब पा लिया है बाबा मैंने तो तेरा होके

मेरे घर से अब ना जाना कहती हूँ मैं रो रो के

राखी की अर्ज़ी बाबा रिश्ता यूँ ही निभाना

राधिका की अर्ज़ी बाबा रिश्ता यूँ ही निभाना

जब भी तुम्हे पुकारूँ तुम दौड़े चले आना

महक गया है तन मन मस्ती में तेरी खो के

मेरे घर से अब ना जाना कहती हूँ मैं रो रो के

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।