पैदल आये गणराज देखो मटक मटक के

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

पैदल आये गणराज देखो मटक मटक के,

चूहा को बतलाये बिना धीरे से सटक के,

पैदल आये गणराज देखो मटक मटक के,

भक्तो की है दूर नगरियाँ,

इक तो उची नीची डगरिया,

जंगल जंगल पर्वत पर्वत,

गलियां गलियां भटक भटक के,

पैदल आये गणराज देखो मटक मटक के,

न लाडुआ का भोग लगाये,

भक्तो को प्रभु आ के बताये,

तुम्हरे भुलाने पर हम आये सुका पानी घटक घटक के ,

पैदल आये गणराज देखो मटक मटक के,

रिमझिम बरसे काली बदरियाँ,

नाही कोई संग सांवरियां,

पीताम्भर को पानी भगतो आ गये देखो झटक झटक के,

पैदल आये गणराज देखो मटक मटक के,

मुह माँगा वरदान मिलेगा,

भक्तो को समान मिलेगा,

लुट सको तो लुट लो भक्तो ना रह जाउगे लटक लटक के,

पैदल आये गणराज देखो मटक मटक के,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।