मैं तो बस साई की धुन में खो गया

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॥ पावन पाठ ॥

मैं तो बस साई की धुन में खो गया,

मैं तो बस बाबा का हो गया,

दिल पागल है दीवाना है,

ये हाल साई को दसने दे,

मुझे साई के द्वार नचने दे मुझे नचने दे,

मुझे लगन लगी दिल में वो वसा मैं तो उसका ही करता सजदा,

इक आवारा सा बादल हु अब खुल के मुझको बरसन ने दे,

मुझे साई के द्वार नचने दे मुझे नचने दे,

कोई और न मुझको प्यारा है इक साई मेरा सहारा है,

उस के हित की है ये नजरे तू अब न इनको हटने दे,

मुझे साई के द्वार नचने दे मुझे नचने दे,

साई संध्या में साई आएंगे साई सब को दर्श दिखाएंगे,

सब की किस्मत खुल जायेगे मुझे साई के रंग में रंगने दे,

मुझे साई के द्वार नचने दे मुझे नचने दे,

चाहत है उसकी चरण मिले जीवन का गुलशन महक खिले,

खुश्बू उसके है नूर ये दीपक बॉबी तू महक ने दे ,

मुझे साई के द्वार नचने दे मुझे नचने दे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।