मुझमे राम तुझमे राम सबमे राम समाया

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

गली गली ढूंढा, वन वन ढूंढा,

कहा कहा ढूंढा राम,

सब जग ढूंढा मैंने, मन नहीं ढूंढा,

जहा मिला मेरा राम ।

मुझमे राम तुझमे राम सबमे राम समाया,

सबसे करलो प्रेम यहां कोई नहीं पराया,

यहां कोई नहीं पराया।

एक बाग़ के फूल हैं सारे,एक हार के मोती,

जितने हैं संसार में प्राणी,सबमे एक ही ज्योति

भूल गए उस परम-पिता को जिसने हमे बनाया,

सबसे करलो प्रेम यहां कोई नहीं पराया,

यहां कोई नहीं पराया।

एक पिता के बच्चे है हम,एक हमारी माता,

दाना पानी देने वाला सबका एक है दाता,

मेरा है यह मैंने कमाया,मूरख क्यों भरमाया,

सबसे करलो प्रेम यहाँ कोई नही पराया,

यहां कोई नही पराया।

कण कण में प्रतिबिम्ब है उसका,ब्रह्म तुम्हारी माया

क्यों कर किसी से बैर करोगे,कौन है यहाँ पराया,

सेवा धर्मं ही श्रेष्ठ धर्म है,गुरुओं ने बतलाया,

सबसे करलो प्रेम यहां कोई नही पराया,

यहाँ कोई नही पराया।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।