नी मैं वारी वारी जावा अपने गुरा तो

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

नी मैं वारी वारी जावा अपने गुरा तो

आप तरे जग तारिया

ऐथे गुरा ने इस्नान जे किता

ऊथे मैं सरोवर बना देया

नी........

ऐथे गुरा ने पानी जे पिता

ऊथे मैं कुआ बना देया

नी........

ऐथे गुरा ने खाना जो खाधा

ऊथे मैं लंगर लगा देया

नी........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।