ओ नन्द देया लाड़लिया असा प्यार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ओ नन्द देया लाड़लिया असा प्यार तेरे नाल पाया

ओ अखा विचो अंजू सुख गये पर तेनु तरस ना आया

सारी सारी रात तेरी याद विच सोई ना

घड़ी ओ केह्डी दस जिस खडी रोई ना

ओ लोकी मैनु ताने मारदे तेरा श्याम हजे वी ना आया

ओ नन्द.........

दिल दिया गल्ला दस किसनु सुनावा मैं

जखम दिला दे दस किसनु दिखावा मैं

मेरी हुन जींद मुक गई पर तेनु तरस ना आया

ओ नन्द..........

यमुना दे कंडे कंडे कई वारी लबेया

गोपिया ग्वाला तो मैं कई वारी पुछया

ओ सखिया तो पुछ्दी फिरा पर तेरा पता वी ना पाया

ओ नन्द.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।