तेरे द्वार के लाख दीवाने

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे द्वार के लाख दीवाने दीवाने तेरे द्वार के लाख दीवाने,

खड़े है रानी कर जोड़ के है खड़े है रानी कर जोड़ के कर जोड़ के,

तेरे द्वार के लाख दीवाने

तेरे दर्श के नैन दीवाने खड़े है रानी कर जोड़ के कर जोड़ के,

तेरे द्वार के लाख दीवाने...

माये उचे भवन में विराजे सवाली तेरे द्वार खड़े,

तेरे दर्शन के अविनाशी हां माँ मन में आस बड़ी,

हम जायेगे न दर से खाली रहे गे कर कर जोड़के,

तेरे द्वार के लाख दीवाने.......

माई संतोषी जग जगनी जन मन संतोष भरे,

माई देखे कई हमने द्वारे द्वार पर नही देखे हम इसे,

यहाँ पल में मुराद हो पूरी तो कैसे जाए दर छोड़ के दर छोड़ के ,

तेरे द्वार के लाख दीवाने

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।