बड़े पर्वत में बाजे वधाई जन्म लिए घनराज

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

बड़े पर्वत में बाजे वधाई जन्म लिए गणराज ,

गोरा मियां झूला झुलाये झूल रहे गणराज

बड़े पर्वत में बाजे वधाई जन्म लिए गणराज ,

सारे जग में आनद छाया खुश है गोरा माई,

शिव गोरी घर खेले ललना सखियाँ मंगल गाई,

नंदी बंगी नाच रहे भजा भजा के ताल,

गोरा मियां झूला झुलाये झूल रहे गणराज.

अगर चंदन का बना पालना रेसम डोर लगाई,

हस हस झूला झूले गजानंद गिरजा मन मुस्काई,

दसो दिशा में शोर मचा है हे गोरी के लाल,

गोरा मियां झूला झुलाये झूल रहे गणराज.

दर्शन करने सारे देवता देवियां संग में आई,

देख देख प्यारे ललना को फूली नहीं समाई,

नेहा संग रघुवीर भी आये दर्शन करने आज,

गोरा मियां झूला झुलाये झूल रहे गणराज.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।