कालो के भी काल की जय बोलो महाकाल की

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कालो के भी काल की जय बोलो महाकाल की,

माथे चंदा शीश पे गंगा गले नाग और भस्मी अंग,

पार्वती संग है शिव है विराजे हाथो तिरशूल डमरू साजे,

देव गंबर वाल की जय बोलो महाकाल की,

नंदी नाचे भंगी नाचे जब जब शिव का डमरू भाजे,

रुदर रूप में शिव जब आते तीन लोक थर थर कप जाते,

माह रूद्र जटा ब्याल की जय बोलो महाकाल की,

महाकाल महा देव की माया अब तक कोई समज न पाया,

शिव ने ऐसा रूप बनाया सब पर रहती शिव की छाया,

दीपा उठाये पालकी जय बोलो महाकाल की,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।