गोरी के लाला रखियो जी रखियो म्हारी लाज जी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

गोरी के लाला रखियो जी रखियो म्हारी लाज जी,

हाथ जोड़ थारी करू वंदना सुन लीजियो महाराज जी,

गोरी के लाला रखियो जी रखियो म्हारी लाज जी,

इक दंत दया वनत कहावो महिमा थारी भारी,

चार बुजा माथे तिलक सुहावे शोभा सब से न्यारी,

करो सवारी मूषक की देवो के सरताज जी ,

गोरी के लाला रखियो जी रखियो म्हारी लाज जी,

धान धरे जो प्रथम तिहारो मन वंचित फल पावे,

मिट जावे सब विघ्न विनाशक रिद्धि सीधी घर आवे,

सब की नाइयाँ पार करो म्हाने करियो भव से पार जी,

गोरी के लाला रखियो जी रखियो म्हारी लाज जी,

पूजा पाठ न आवे कोई कैसे तुम्हे मनाओ,

अव गुण महारे ध्यान न धरियो चरनन शीश निभाउ,

प्रीत सदा चरनन की पाउ दे दीजियो जी वरदान जी,

गोरी के लाला रखियो जी रखियो म्हारी लाज जी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।