गणपति देवा जय गणपति देवा

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

गणपति देवा जय गणपति देवा करलो स्वीकार देवा मेरी भी सेवा,

काटो कलेश गोरी नन्द गणेश लाया पान सुपारी मेवा,

देवा हो देवा गणपति देवा.....

है इक दंत देवा आधी न अंत तेरी महिमा अंत देव तुझसे न दूजा,

है दया वनत न साधू न संत न सन्यांसी महंत न जानू पाठ पूजा,

उची तेरी शान देवा तुम हो महान कल्याण करो अब मेरा,

देवा हो देवा गणपति देवा.....

माथे पे टिका हल्दी कुम कुम रोली का जान पड़ जाए फीका तेज मुख पे निराला,

साजे मुकट शीश हीरे मोती का मन मोहे सभी का गले फूल वाला,

मूषक सवारी देवा चार भुजा धारी लड्डू मोदक से लगे भोग तेरा,

देवा हो देवा गणपति देवा.....

भाजे नगाड़े तू तारे तेरे द्वारे गूंजे जय कारे ढम ढम भजाऐ ढोल ढोली,

घंटा घड्याळ शंख छालर खड़ताल मस्ती में नाचे तेरे भक्तो की टोली,

भरसे गुलाल भानी केसरियां लाल भाजे दुनिया में डंका तेरा,

देवा हो देवा गणपति देवा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।