गौरी माँ के लाल पधारे

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

गौरी माँ के लाल पधारे

देवो के इक देव हमारे

रिद्धि सिद्धि सुख के दाता

आज चलें खुद संग हमारे

देवा रे गणपति देवा रे

मैंने आस लगाई मैंने कृपा पाई

तेरी एक दया से मैंने तो मंज़िल पाई

वेदों ग्रंथो में तेरा आदर

कृपा दया के तुम हो सागर

पाप बढ़ा जब जब धरती पर

सत्य किया तुमने ही उजागर

देवा रे गणपति देवा रे

मेरे देव गजानन मेरे विघ्न विनाशन

मेरे मंगल मूर्ति मेरे शुभ गन कानन

लाल बाग़ के तुम हो राजा

मस्तक पे अब तेज विराजा

दुखियाँ निर्बल के रखवाले

तोड़ दिए अज्ञान के ताले

देवा रे गणपति देवा रे

गैरो माँ के लाल पधारे

देवो के एक देव हमारे

रिद्धि सिद्धि सुख के दाता

आज चलें खुद संग हमारे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।