बोलते चलो बोलते चलो शेरावाली के जैकारे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बोलते चलो , बोलते चलो

शेरावाली के जैकारे बोलते चलो ,

मेहरवाली के जैकारे बोलते चलो

बड़े भी बोलो , छोटे भी बोलो

खड़े भी बोलो बैठे भी बोलो

बिगड़े काम बनाने वाली माता,

डूबते तारो का तारने वाली माता,

सारे बोलो , रल मिल बोलो , ऊँचा बोलो

जय दुर्गे जय आदि भवानी , कह कर आगे बढ़े चलो

लेकर ओट दयालु मात की ऊँचे पर्वत चढ़े चलो

धरती बोले,अम्बर बोले ,नदिया बोले,सागर बोले,बोले सारे नज़ारे,

बोलते चलो बोलते चलो

सारे संकट हरने वाली माता ,

खाली झोलियाँ भरने वाली माता ,

बोलते चलो

आते बोलो,जाते बोलो,अगले भी बोलो,पीछे भी बोले,

माँ की भक्ति अद्भुत शक्ति , हर मुश्किल आसान करे,

तुफानो में दिए जलाकर , भक्तो का कल्याण करे,

तोता बोले,मैना बोले ,ढोलक बोले , छेना बोले ,बोले ढोल नगारे

सोये भाग्य जगाने वाली माता,

अमृत रस बरसाने वाली माता,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।