झुँझन वाली का लाड लड़ावन आया हां

पारंपरिक
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

झुँझन वाली का लाड लड़ावन आया हां,

मुकलावा दादी जी थारो मैं भी लाया हा,

जयपुर की मैं चुनड़ी लाया मुंबई की मैं मुंदरी लायो,

रोली मोली बिछियां पायल मेहँदी का मैं थाल सजाइयो,

सदियों पुरानी रीत मैं निभावन आया हा,

मुकलावा दादी जी थारो मैं भी लाया हा,

जो भी मुकवालो लावे है दादी जी के घर जावे है,

बेटा बेटी पोता पोती सेह का व्याह या करवावे है,

कुल देवी से प्यार बढ़ावन आया है,

मुकलावा दादी जी थारो मैं भी लाया हा,

हाथो में लेकर मुकलावा नाचता कूदता सेवक आया,

नारानी ने लेवा खातिर तन धन जी ने साथ लाया,

जग सेठानी ने म्हे ले जावन आया हां,

मुकलावा दादी जी थारो मैं भी लाया हा,

मुकलावे को इक बहानो दादी जी थाने है रिजानो,

श्याम पे इतनी किरपा कीजिये चरना माहि दे जो ठिकानों,

छिपा जो मन में भाव वो दिखावैं आया हा

मुकलावा दादी जी थारो मैं भी लाया हा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।