खोलते है साई बाबा क़िस्मत का ताला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन साईं भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सिर पे पटका बदन पे चोला कैसा वो निराला रे,

खोलते है साई बाबा क़िस्मत का ताला,

जिस बंदे पे साई ने नजरो को डाला रे,

खुल गई उस की लोटरी कैसी जादू डाला रे,

हाथ में चिलम बगल में चिमटा साई का शृंगार है,

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई शिरडी सब का दरबार है,

भोला भाला शंकर साई वही मुरली वाला रे,

खोलते है साई बाबा क़िस्मत का ताला

कभी पालकी पर वो बैठे कभी नीम की छाव रे,

बिक्शा मांगे घर घर साई वो भी नंगे पाँव रे,

पानी से दीपक जला कर कियो शिरडी में उजाला रे,

खोलते है साई बाबा क़िस्मत का ताला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।