साई मेरी अर्जी बता कहा पे छुपाई है

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॥ पावन पाठ ॥

लाखो की साई बिगड़ी तूने बनाई है,

साई मेरी अर्जी बता कहा पे छुपाई है,

लाखो की साई बिगड़ी तूने बनाई है,

कड़वी नीम की मीठी काया सब को बड़ा लुभाती है,

जो भी तेरे दर पे आता उस का भाग जगाती है,

मेरी बारी में क्यों देर लगाई है,

साई मेरी अर्जी बता कहा पे छुपाई है,

उधि तेरी बाबा सब के दुःख और रोग मिटाती है,

द्वारका माई में तू ही सब के कष्ट और पाप जलती है,

मैंने भी साई उधि तन पे रमाई है,

साई मेरी अर्जी बता कहा पे छुपाई है,

वेंडी पावक शीतल छाया मन शीतल कर जाती है,

नंदा दीपक पावन लोह साई तेरी याद दिलाती है,

मैंने भी तेरे नाम की अलख जगाई है,

साई मेरी अर्जी बता कहा पे छुपाई है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।