मेरे घर में रोज दिवाली है

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे घर में रोज दिवाली है,

क्यों की मेरी कुल की देवी ये मैया ढांढनवाली है,

मेरे घर में रोज दिवाली है,

ये छपड फाड़ के देती है वारे न्यारे कर देती है,

इस के जैसी इस दुनिया में कही देखि न दातारि है ,

मैं इनकी शरण में रहता हु,

चरणों की छाव में बेहता हु,

ये मेरी हर पल और मेरे घर की करती रखवाली है,

मेरा काम कोई भी न अटके मेरे पास मुसीबत न फटके,

आने से पहले ही इसने हर विपदा मेरी टाली है

मेरी तकदीर का क्या कहना मेरी कुल देवी ये दो बेहना,

सोनू दोनों का प्यार मिला मेरे जीवन में खुशाली है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।