जन्म जन्म का साथ है गुरुदेव तुहारा

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॥ पावन पाठ ॥

जन्म जन्म का साथ है, "गुरुदेव तुम्हारा" ll

अगर न मिलते, हमको सतगुरु, लेते जन्म दोबारा,

जन्म जन्म का ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

जीवन का आधार है, तेरा एक सहारा l

अमृत सा रस देता है, सतगुरु नाम तुम्हारा l

गुरु जी को पा के, धन्य हुआ है, घर संसार हमारा,

जन्म जन्म का ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

जिस मन में तेरा नाम है, सतगुरु जी भगवान l

उस प्राणी ने पा लिया, जैसे बैकुण्ठ धाम l

सतगुरु जी मेरे, रोम रोम ने, तेरा नाम पुकारा,

जन्म जन्म का ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

तेरे सिवा मेरे मन को सतगुरु, कुछ भी रहे न ध्यान l

हरपल तुझको ही ध्याऊँ, दे दो यह वरदान l

किरपा से तेरी, तीनो लोक में, होता है उजियारा,

जन्म जन्म का ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

तन मन धन सब वार दूँ, सतगुरु जी भगवान l

सतगुरु शक्ति दो मुझे, देकर शब्द नाम l

सतगुरु जी के, चरणों में है, बैकुण्ठ धाम हमारा,

जन्म जन्म का ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।