मैया खोले तू किस्मत का ताला

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैया खोले तू किस्मत का ताला माँ तेरा दरबार जग से निराला,

जय संतोषी माता जय संतोषी माता,

नाम संतोषी मुख भोला भाला माँ तेरा दरबार जग से निराला,

जय संतोषी माता जय संतोषी माता,

मैया खोले तू किस्मत का ताला माँ तेरा दरबार जग से निराला,

जय संतोषी माता जय संतोषी माता,

सब के तू भण्डार भरे,

सब का बेडा पार करे जो भी तुझको ध्याए उसका तू उधार करे,

सब की विपदा हर ती तू चिंताओं को हरती तू,

जो भी फेलाए झोली माँ खाली झोली भरती तू,

बांजो को संतान माँ दे आज्ञानी को ज्ञान माँ दे तेरा उचा है सब से दिवाला,

माँ तेरा दरबार जग से निराला

कष्ट मिटाए सब के तू,दाग हटाए सब के तू,

जो भी द्वारे आता है ममता लुटाये उस पे तू,

निर्धन को धनवान करे दीन दुखी बलवान करे,

हे देवी संतोषी माँ जन जन का कल्याण करे,

सरब सुखो की खान है माँ ये संतोष का दान है माँ,

तेरा नाम बड़ा गुण वाला माँ तेरा दरबार जग से निराला

तेरी महिमा गाये जो सभी सुखो को पाए वो,

जो व्रत करता तेरा माँ भवसागर तर जायेवो,

जोधपुर में धाम बना गुना में मियाँ दर्श दिखा,

उजैन मुंबई में माँ भक्तो के तू काज बना,

दिल्ली में माँ चोंकी लगा भगतो के तू भाग लगा,

जपे शंकर तेरी माया,

माँ तेरा दरबार जग से निराला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।