थारी उमर रा गिणयोडा दिनडा जावे रे मिजाजी

संत कबीर
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

थारी उमर रा रा गिणयोडा दिनडा जावे रे,

मिजाजी थोडो राम ने सुमिर ले रे,

चार दिनां री बंदा जोश जवानी रे,

थारे लारे रे बुढ़ापो दौङ्यो आवे रे,

मिजाजी थोङो राम ने...

कोङी रे कोङी बंदा माया झोडी रे,

थारे संग में ना चाले कोडी रे,

मिजाजी थोङो राम ने....

जिने तुं बंदा थारा मारा केवे रे,

वे तो थारे ही आग लगावे रे,

मिजाजी थोङो राम ने....

कहत कबीर बंदा सुमिरन कर ले रे,

थारो आवा-गमन मिटावे रे,

मिजाजी थोङो राम ने....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।