रात जागरण दी आई है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

भाग जागे ने मेरे मियां घर मेरे आई है,

संता महंता भगता रोनका भी लाइ है,

सोहने रंगे शेर उते शेरावाली आई है,

सारे तड़िया भजाओ रात जागरण दी आई है,

खुशिया मनाओ रात जागरण दी आई है,

किता आवाहन पहला संता महंता ने,

लाल लाल टिके लाये सरियाँ ही संगता ने,

ज्योत नूरानी देखो ज्वाला जी तो आई है,

सारे मैनु रल मिल दिंदे पाए वधाई है ,

सारे तड़िया भजाओ रात जागरण दी आई है,

खुशिया मनाओ रात जागरण दी आई है,

चंदन दी चौंकी उते आसान लगाया है,

चांदी वाले गढ़वे विच गंगा जल पाया है,

लाल लाल घोटे वाली चुनी मैं चढ़ाई है,

चुनरी न ओड के मेरी दाती मुस्काई है,

सारे तड़िया भजाओ रात जागरण दी आई है,

खुशिया मनाओ रात जागरण दी आई है,

कण्व अरुण लाल तेरा भेटा सुनंदा है,

चल दी है रोजी रोटी तेरा दिता खानदा है,

धन्ने ने एह गल लोको सब नु सुनाई है

खुशिया दी रात मेरी मैया ने विखाई है,

सारे तड़िया भजाओ रात जागरण दी आई है,

खुशिया मनाओ रात जागरण दी आई है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।