तूने सब के काज सवारे माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तूने सबके काज, 'सवारे माँ ll',

कभी मेरे भी सवारो, तो जानू xll

(मेरे काज सवारों तो जानू xll )

कई भव से पार, 'उतारे माँ lll',

कई भव से पार, 'उतारे माँ ll',

कभी मुझे भी उतारो, तो जानू xll

( मुझे पार उतारो, तो जानू,

मेरे काज सवारो, तो जानू xll )

जग तेरा खेल, तमाशा माँ,

तेरी, जो इच्छा, तूँ कर सकती l

तूँ ज़रा सा हाथ, हिला कर के,

गागर में, सागर भर सकती ll

( गागर में सागर भर सकती xll )

तेरी ममता सब को, 'पुकारे माँ lll'

तेरी ममता सब को, 'पुकारे माँ ll',

कभी मुझे भी पुकारो, तो जानू xll

( कभी मुझे भी पुकारो, तो जानू xll

मुझे पार उतारो, तो जानू,

मेरे काज सवारों, तो जानू )

तेरी पड़े ज़रा सी, छाया तो,

माँ विष भी अमृत, हो जाता l

गुनाहगार, गुनाह से कर तौबा,

तेरे ज्ञान में, हरदम खो जाता ll

( तेरे ज्ञान में, हरदम खो जाता llll )

ओ भक्तों के कष्ट, 'निवारे माँ lll'

भक्तों के कष्ट, 'निवारे माँ ll'

कभी मेरे भी निवारो, तो जानू xll

( कभी मेरे भी निवारो, तो जानू xll

मुझे पार उतारो, तो जानू,

मेरे काज सवारों, तो जानू )

तेरे एक इशारे, पर मईया,

धरती पर अम्बर, आ सकता l

यह सूरज, शीतल हो सकता,

चँदा भी आग, लगा सकता ll

( चँदा भी आग, लगा सकता llll )

तूँ दया से सब को, 'निहारे माँ lll'

तूँ दया से सब को, 'निहारे माँ ll'

मुझको भी निहारो, तो जानू xll

( मुझको भी निहारो, तो जानू xll )

ओ कई भव से पार, 'उतारे माँ lll',

कई भव से पार, 'उतारे माँ ll',

कभी मुझे भी उतारो, तो जानू xll

( मुझे पार उतारो, तो जानू,

मेरे काज सवारों, तो जानू xllxll )

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।